प्रिय आमिर ख़ान साहब,

आपके पर्फेक्शनिज़्म से तो पूरी दुनिया वाकिफ़ है। इसके अलावा सामाजिक समस्यों के प्रति आपके रुझान से हम सब भली भांति परिचित हैं। पर इस बार आपसे इतनी बड़ी चूक कैसे हो गयी। नहीं नहीं, असहिष्णुता के प्रति आपके टिप्पणी से मेरा कोई सरोकार नहीं हैं। क्योंकि आप एक ऐसे देश के निवासी हैं जहां संविधान ने सबको विचारों की अभिव्यक्ति का अधिकार दिया है। परन्तु मेरी नाराज़गी आपके गैर-ज़िम्मेदार रवैये से है। अधिकार के साथ आपकी एक नागरिक होने के नाते कुछ जिम्मेदारियां भी हैं।

aamir khan intoleranceदेश में असहिष्णुता बढ़ी है कि नहीं यह अलग विवाद है और मुनासिब होगा कि आप इसे मीडिया और मंत्रालयों पर छोड़ दें। हम तो आपसे इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में कार्य करने की अपेक्षा रखते हैं। और ये और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब आप अपने सामर्थ्य और पहुँच से वाकिफ़ हैं। हमें ख़ुशी होती है जब शाहरुख़ ख़ान अराजक तत्वों से ये कहते हैं कि भारत उनका देश है। पर हमें निराशा होती है जब आप जैसा बुद्धिजीवी कहता है कि उनकी बीवी उन्हें भारत छोड़ने की सलाह देती हैं। क्या ये ब्यान देते हुए आपने ये नहीं सोचा कि अगर आप जैसा सुरक्षा और सुविधा संपन्न भारतीय अपने डर का इज़हार करता है तो आम जनता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। क्या आप जाने-अनजाने इस मुद्दे को और हवा नहीं दे रहे। चार दिनों से मीडिया आपके ब्यान का रिकॉर्ड बजा रही है और जनता इसे अध-पके ज्ञान से सही-गलत कयास लगा रही है।

 

खैर मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा क्यूंकि मैं जानता हूँ ये सन्देश आप तक नहीं जाएगा पर इतनी गुज़ारिश ज़रूर करूँगा कि एक ज़िम्मेदार और प्रभावशाली शख़्सियत होने के नाते आप किसी भी निजी स्वार्थ से प्रेरित होकर नेगेटिव पब्लिसिटी का सहारा न ले। और लोगों को सकारात्मक सोच दें, परस्पर सौहार्द और सद्भाव की पृष्टभूमि तैयार करने में अपना सहयोग दें ताकि साम्प्रदायिक माहौल तैयार करने वालों को मुंह की खानी पड़े।

इसके साथ-साथ मैं आलोचकों से भी अनुरोध करूँगा कि किसी व्यक्ति का विरोध करने के बजाय उस सोच और स्वार्थ का विरोध करें जिससे प्रेरित हो कर कुछ लोग अपना उल्लू सीधा करने की कोशिश करते हैं। और इस दिशा में पहला कदम हो सकता है आमिर की आगामी फ़िल्म का बहिष्कार करना ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी लाभ के लिए जाने या अनजाने नेगेटिव पब्लिसिटी बटोरने के इरादतन किसी संवेदनशील मुद्दे को सुलगाने की हिमाकत ना करे। और वैसे भी इस पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वालों की भी कमी नहीं हैं। हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारा उद्दार सिर्फ हम खुद कर सकते हैं। किसी व्यक्ति विशेष में ना तो इतना सामर्थ्य है और ना ही नीयत।

और हाँ आमिर साहब, अब जबकि आप सेल्फ डिफेन्स की सोच रहे होंगे और कोशिश करियेगा कि ये रचनातमक और 300 करोड़ कमाने वाला हो ना हो, सकारात्मक ज़रूर होना चाहिए। बाकी आप स्वयं समझदार हैं और पत्र का उत्तर तो आप देंगे नहीं।

धन्यवाद,
जय भारत!

और लगे हाथ आपको आपका आजमाया हुआ सेल्फ डिफेंस का एक तरीका भी याद दिल देते हैं…

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